ओ भोलेनाथ केदारनाथ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले छोड़ दुनिया दर तेरे आया हु मै,

तुझसे जो दूर था बेचैन था घर लौट आया हु मै,

ये आसमा है नीला नीला धुप नरम लगे चुभती नही है,

की बहता पानी मीठा मीठा प्यास दिल की भुज सी गयी है,

की दिल मई उड़ रही है तितलियाँ हुआ है आज बाग़,

मधुर बजे है कोई बंसी हवाए शंखनाद,

भोले की तेरे ये दर सा नज़ारा,

नही है खाई पुरे संसार मे,

जो पोहोचा वो स्तब्ध सा देखता ही रह गया,

कहने लगा दोनों हाथ जोड़ की,

कहा मै आ गया लगे की पा गया....

भोलेनाथ दर तेरे ये स्वर्ग सा लगे,

ओ भोलेनाथ केदारनाथ,

ओ सोमनाथ ओ तुंगनाथ,

ओ मेरे नाथ...

लाखो मीलों चल की आयें दरवाजे झुक के खड़े है,

भोले तेरे चाहने वाले मिलना है जिद पे अड़े,

आखो मे भर की तस्वीर कर लूँ पलकों मे रखूं मैं सजा के,

मन मे ही तेरा मंदिर बना लू दी से मे रखुं लगा की,

दिल मे उड़ रही है तितलियाँ हुआ है आज बाग़,

मधुर बजे है कोई बंसी हवाए शंखनाद,

आया मै जो आया पाया मैने पाया,

दर तेरा भाया मुझे बाबा,

आया मे जो आया पाया मैने पाया,

देखा आँखों से तो आया यकीन आया,

कहते है क्यों देवभूमि धारा को,

स्वर्ग से आती है यहाँ हवा,

जो ये छुती है तन को शीतल मन हो,

लगे तू पास है कोई भी शान हो,

रंग बिरंगी है फूलों की घाटियाँ,

रात सितारों से जगमग हो वादियाँ,

यहाँ पहाड़ो मई रहता हु भोले,

सुंदर नजारों मई रहता तू भोले,

दर तेरा घर तेरा है भाया भोले भोले मेरे भोले,

यहाँ कण कण मई तू समाया भोले भोले मेरे भोले.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।