मेरा हारावाला रोनका लगाई रखदा

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॥ पावन पाठ ॥

भगता दी झोली खैर पाई रखदा,

मेरा हारावाला रोनका लगाई रखदा,

ऐ मेहरावाला मीह बरसाई रखदा,

मेरा हारावाला रोनका लगाई रखदा....

दर उते जो भी आवे खाली नहीं मोड़ दा,

भगता प्यारया दा दिल नहियो तोड़ दा,

मेहरावाला मीह बरसाई रखदा,

मेरा हारावाला रोनका लगाई रखदा....

दर्शन पांदे सारे भगत प्यारे ने,

हारावाले दे सारे बोलण जयकारे ने,

ऐ ता फूला वाली माला गल पाई रखदा,

मेरा हारावाला रोनका लगाई रखदा....

दिल विच रेहँदा करे कार दी सवारी ऐ,

सतगुरु प्यारे दा जलवा नूरानी ऐ,

डोरा प्रेम वाली सबते पाई रखदा,

मेरा हारावाला रोनका लगाई रखदा....

दर उते जदो आया जग ठुकराया सी,

दास दी बेड़ी नु पार तुसी लाया सी,

बेड़ा डुबन नहीं देंदा बन्ने लाई रखदा,

मेरा हारावाला रोनका लगाई रखदा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।