दरबार प्रभु दा ओ दिसदा

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ओ दिसदा ओ दिसदा,

दरबार प्रभु दा ओ दिसदा,

खुले दर्शन कर लो, प्रभु दा दर ओ दिसदा,

ओ दिसदा ओ दिसदा,

दरबार प्रभु दा ओ दिसदा....

दाता चरणी दे नाल लाया,

साहनु दर ते आप बुलाया,

दिता हिरदा ठार, प्रभु दा दर ओ दिसदा,

ओ दिसदा ओ दिसदा,

दरबार प्रभु दा ओ दिसदा....

मन रूपी फल सी मुरजाया,

प्रभु ने प्रेम दा पानी पाया,

खिड़ गई सब गुलजार, प्रभु दा दर ओ दिसदा,

ओ दिसदा ओ दिसदा,

दरबार प्रभु दा ओ दिसदा....

पहली दर ते शीश निवा के,

मंदिरो में जयकारे ला के,

जाना दासों ने आज, प्रभु दा दर ओ दिसदा,

ओ दिसदा ओ दिसदा,

दरबार प्रभु दा ओ दिसदा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।