सुन माँ सुन

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुन माँ सुन,

सुन माँ सुन,

सुन माँ सुन,

माँ सुन ले विनती,

ले विनती माँ सुन,

विनती तो सबकी ही अम्बे माँ तू सुनती,

दर पे कबसे खड़े फरियादी,

क्यों माँ इतनी देर लगा दी,

अब तो भक्त जनो की बातें ले माँ सुन,

आंसू इन नैनो से बहते,

तुझको घडी घडी ये कहते,

इन माँ बेहालो का हाल ज़रा तू सुन,

ऐ विनती ले विनती माँ सुन...

सुन माँ सुन,

सुन माँ सुन,

माँ सुन ले विनती यही....

सुन माँ सुन,

सुन माँ सुन,

उपकार कर भी दे माँ,

उद्धार कर भी दे माँ,

भक्तो के सपने सभी,

साकार कर भी दे माँ,

तेरे सिवा माँ कौन सुने,

इस दिल के हाल को,

सीधी कर दे आज समय की टेढ़ी चाल को,

तेरे सिवा माँ कौन सुने इस दिल के हाल को,

सीधी कर दे आज समय की टेढ़ी चाल को,

सुन माँ सुन,

माँ सुन ले विनती,

ले विनती माँ सुन....

ममता का सागर है तू,

त्रिभुवन की रहबर है तू,

फल बाँटे खुशियों के जो,

अनमोल सरोवर है तू,

बड़े बड़े महादानी तुझसे दान मांगते,

ऋषि मुनि भी भक्ति का वरदान मांगते,

बड़े बड़े महादानी तुझसे दान मांगते,

ऋषि मुनि भी भक्ति का वरदान मांगते,

माँ सुन ले विनती,

ले विनती माँ सुन,

ले माँ सुन,

विनती तो सबकी ही अम्बे माँ तू सुनती,

दर पे कबसे खड़े फरियादी,

क्यों माँ इतनी देर लगा दी,

अब तो भक्त जनो की बातें ले माँ सुन,

आंसू इन नैनो से बहते,

तुझको घडी घडी ये कहते,

इन माँ बेहालो का हाल ज़रा तू सुन,

ऐ विनती ले विनती माँ सुन...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।