गौरा की कदर जानी नहीं

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव जी हमारे बेवफा,

गौरा की कदर जानी नहीं,

भोले हमारे बेवफा,

गौरा की कदर जानी नहीं॥

ऐसे ताल से क्या फायदा,

जिसमें तनक पानी नहीं,

शिव जी हमारे बेवफा,

गौरा की कदर जानी नहीं......

ऐसे मनुष्य से क्या फायदा,

जिस की मधुर वाणी नहीं,

शिव जी हमारे बेवफा,

गौरा की कदर जानी नहीं......

ऐसे वृक्ष से क्या फायदा,

जिसकी तनक छाया नहीं,

शिव जी हमारे बेवफा,

गौरा की कदर जानी नहीं......

ऐसे जीवन से क्या फायदा,

जिसमें हरि सत्संग नहीं,

जिसमें तनक फुर्सत नहीं,

शिव जी हमारे बेवफा,

गौरा की कदर जानी नहीं......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।