तू है मोहन मेरा मैं दीवाना तेरा (by gaurav krishan goswami ji)

श्री गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तू है मोहन मेरा मैं दीवाना तेरा,

मेरी बिगड़ी बनाना तेरा काम है,

छोड़ दी अपनी कश्ती तेरे नाम पर,

अब किनारे लगाना तेरा काम है।

मैंने तुझको बिसारा गुनहग़ार हूँ,

कैसे मुख को दिखाऊँ शर्मशार हूँ ।

जिस तरह से वो रीझे वही राह हूँ,

ऐसी राह पे चलाना तेरा काम है ॥

तू है मोहन मेरा मैं दीवाना तेरा,

मेरी बिगड़ी बनाना तेरा काम है।

बड़ा दर्द है दिल में तेरे प्यार का,

कैसे दर्शन हो प्यारे दिलदार का ।

तेरी बाँकी अदा ने हमें घायल किया,

अब दवा को पिलाना तेरा काम है ॥

तू है मोहन मेरा मैं दीवाना तेरा,

मेरी बिगड़ी बनाना तेरा काम है।

छीन कर दिल को तूने क्या जादू किया,

मेरा हाथों से दिल को बेकाबू किया ।

प्रेम विरह की अग्नि जले रात दिन,

अब लगी को निभाना तेरा काम है ॥

तू है मोहन मेरा मैं दीवाना तेरा,

मेरी बिगड़ी बनाना तेरा काम है।

तुं मालिक है मैं हूँ पुजारी तेरा,

तुं दाता है मैं हूँ भिखारी तेरा ।

मस्त हरदम रहूँ मैं तेरी याद में,

ऐसा जाम पिलाना तेरा काम है ॥

तू है मोहन मेरा मैं दीवाना तेरा,

मेरी बिगड़ी बनाना तेरा काम है।

है सबको पता मैंने तुझको वरा,

जानते तुम भी तूने जुदा जो किया ।

होगी बदनामी तेरी ये खुद जान लो,

मेरी लाज बचाना तेरा काम है ॥

तू है मोहन मेरा मैं दीवाना तेरा,

मेरी बिगड़ी बनाना तेरा काम है।

हँस के तुम चल दिए मैं तो रोती रही,

ना मुड़ के ख़बर इस अभागिन की ली,

अब आना ना आना तेरा काम है ॥

तू है मोहन मेरा मैं दीवाना तेरा,

मेरी बिगड़ी बनाना तेरा काम है।

तेरे चरणों में आकर झुकाया है सर,

नहीं दुनियां में कोई तेरे जैसा दर,

चरणों से लगाना तेरा काम है ॥

तू है मोहन मेरा मैं दीवाना तेरा,

मेरी बिगड़ी बनाना तेरा काम है।

नाम घनश्याम का दीवाना बना देता है,

सारी दुनियां से भी अंजाना बना देता है ।

विहार सांवरे सरकार का मेरे दिल को,

कभी गोकुल कभी बरसाना बना देता है ॥

तू है मोहन मेरा मैं दीवाना तेरा,

मेरी बिगड़ी बनाना तेरा काम है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।