श्री पार्वती जी की आरती

पारंपरिक
महादेव आरती दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता,

ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता ।

अरिकुलपद्म विनासनी जय सेवकत्राता,

जगजीवन जगदंबा हरिहर गुण गाता ।

सिंह का वाहन साजे कुंडल हैं साथा,

देवबंधु जस गावत नृत्य करत ता था ।

सतयुग रूप शील अति सुंदर नाम सती कहलाता,

हेमांचल घर जन्मी सखियन संग राता ।

शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्थाता,

सहस्त्र भुज तनु धरिके चक्र लियो हाथा ।

सृष्टि रूप तुही है जननी शिवसंग रंगराता,

नंदी भृंगी बीन लही है हाथन मदमाता ।

देवन अरज करत तव चित को लाता,

गावत दे दे ताली मन में रंगराता ।

श्री ओम आरती मैया की जो कोई गाता,

सदा सुखी नित रहता सुख सम्पत्ति पाता ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।