श्री संतोषी मां की आरती

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय संतोषी माता जय संतोषी माता ।

अपने जन को सुख सम्पत्ति दाता ।।

सुंदर वीर सुनहरी मां धारण कीन्हों ।

हीरा पन्ना दमके तन श्रृंगार लीन्हों ।।

गेरू लाल छटा छवि बदन कमल सोहे ।

मंद हंसत करुणामयी त्रिभुवन मन मोहे ।।

स्वर्ण सिंहासन बैठी चंवर ढुरे प्यारे ।

धूप, दीप, नैवेद्य, मधुमेवा भोग धरे न्यारे ।।

गुड़ अरु चना परम प्रिय तामें संतोष कियो ।

संतोषी कहलाई भक्तन वैभव दियो ।।

शुक्रवार प्रिया मानत आज दिवस सोही ।

भक्ति मंडली छाई कथा सुनत मोही ।।

मंदिर जगमग ज्योति मंगल ध्वनि छाई ।

विनय करें हम बालक चरनन सिर नाई ।।

भक्ति भावमय पूजा अंगीकृत कीजै ।

जो मन बसै हमारे इच्छा फल दीजै ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।