गुरु बिन कौन छुड़ावे यम ने बांह पकड़ी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

गुरु बिन कौन छुड़ावे यम ने बांह पकड़ी,

बांह पकड़ी भाईयो बांह पकड़ी......

मात पिता और बंधु नाती,

बनी बनी के सब है साथी,

संग ना पैना पाई यम ने बांह पकड़ी,

गुरु बिन कौन छुड़ावे यम ने बांह पकड़ी.......

धंधे कर कर उम्र गुजारी,

लाख करोड़ी माया जोड़ी,

संग ना पैसा पाई यम ने बांह पकड़ी,

गुरु बिन कौन छुड़ावे यम ने बांह पकड़ी.......

दास ना दास लगो गुरु चरनी,

बिन गुरु कौन लंगावे वेतरनी,

सतगुरु देन गवाही यम ने बांह पकड़ी,

गुरु बिन कौन छुड़ावे यम ने बांह पकड़ी.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।