॥ पावन पाठ ॥
गुरु बिन कौन छुड़ावे यम ने बांह पकड़ी,
बांह पकड़ी भाईयो बांह पकड़ी......
मात पिता और बंधु नाती,
बनी बनी के सब है साथी,
संग ना पैना पाई यम ने बांह पकड़ी,
गुरु बिन कौन छुड़ावे यम ने बांह पकड़ी.......
धंधे कर कर उम्र गुजारी,
लाख करोड़ी माया जोड़ी,
संग ना पैसा पाई यम ने बांह पकड़ी,
गुरु बिन कौन छुड़ावे यम ने बांह पकड़ी.......
दास ना दास लगो गुरु चरनी,
बिन गुरु कौन लंगावे वेतरनी,
सतगुरु देन गवाही यम ने बांह पकड़ी,
गुरु बिन कौन छुड़ावे यम ने बांह पकड़ी.......