नाथ ये वो ही है

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

नाथ ये वो ही है रघुनाथ,

जिसने मारा है बाली......

नदियां जिनकी नसों का जाल है,

पेड़ पौधे तन के बाल है,

काल के भी वो तो काल है,

काल के भी वो तो काल है,

सीता रात काली,

जिन्होंने मारा है बाली,

नाथ ये वो ही हैं रघुनाथ,

जिसने मारा है बाली......

वो है पर्वत आप है तिनका,

नाथ विरोध किया है जिनका,

जग जाने है तीर जिनका,

जग जाने है तीर जिनका,

जाए नहीं खाली,

जिन्होंने मारा है बाली,

नाथ ये वो ही हैं रघुनाथ,

जिसने मारा है बाली......

तन मन से सीता है पति की,

ताकत तुम ना जानो सती की,

हैरत है हे नाथ मति की,

हैरत है हे नाथ मति की,

आई कंगाली,

जिन्होंने मारा है बाली,

नाथ ये वो ही हैं रघुनाथ,

जिसने मारा है बाली.......

चंदन रघुनन्दन का सहारा,

जड़ चेतन का वो ही गुजारा,

एक चमन है ये जग सारा,

एक चमन है ये जग सारा,

रघुवर है माली,

जिन्होंने मारा है बाली,

नाथ ये वो ही हैं रघुनाथ,

जिसने मारा है बाली......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।