शेरावाली का लगा है दरबार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरावाली का लगा है दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

मेहरवाली का सजा है दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

जयकारा माँ का जयकारा,

शेरावाली का लगा हैं दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो॥

पर्वत की ऊँची सी चोटी,

चोटी ऊपर जगती ज्योति,

बैठी शेर पे होके सवार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

शेरावाली का लगा हैं दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो॥

ढम ढम ढोल नगाड़े बाजे,

झूम झूम के जोगन नाचे,

माँ की हो रही जय जयकार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

शेरावाली का लगा हैं दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो॥

बजरंगी माँ की सेवा में खड़े,

भैरोनाथ आरती उतारे,

गंगा मैया रही चरण पखार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

शेरावाली का लगा हैं दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो॥

लुटा रही माँ अटल खजाना,

भर भर झोली लुटे जमाना,

माँ ने खोल दिए रे भंडार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

शेरावाली का लगा हैं दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो॥

शेरावाली का लगा है दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

मेहरवाली का सजा है दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

जयकारा माँ का जयकारा,

शेरावाली का लगा हैं दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।