मेरे सोने की लंका सितारों जड़ी

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

रावण समझा के कहता सुनो जानकी,

मेरी लंका है देखो सितारों जड़ी.....

मेरी सोने की लंका तुम्हारे लिए,

मेरी रानी पटरानी है दासी तेरी,

हट जा हट जा रे रावण में डरती नहीं,

ऐसे पापी के दर्शन मैं करती नहीं,

रावण समझा के कहता सुनो जानकी......

मैंने भोजन बनाए तुम्हारे लिए,

खालो खालो सिया मैं हूं तेरा पति,

हट जा हटजा रे रावण मैं डरती नहीं,

ऐसे पापी के दर्शन मैं करती नहीं,

रावण समझा के कहता सुनो जानकी......

मैंने लोटा भराय तुम्हारे लिए,

पीलो पीलो सिया मैं हूं तेरा पति,

हट जा हट जा रे रावण में डरती नहीं,

ऐसे पापी के दर्शन मैं करती नहीं,

रावण समझा के कहता सुनो जानकी......

मैंने सेजे बिछाई तुम्हारे लिए,

सोजा सोजा सिया मैं हूं तेरा पति,

हट जा हट जा रे रावण में डरती नहीं,

ऐसे पापी के दर्शन में करती नहीं,

रावण समझा के कहता.....

तुझको मालूम नहीं मेरे रघुवर पति,

तेरी लंका में कर देंगे वह खलबली,

पास आने की है तेरी हिम्मत नहीं,

एक तिनका हिलाने की हिम्मत नहीं......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।