गुरुजी चिंता बुरी बला बता दो जाएगी कैसे

पारंपरिक
माँ गंगा भजन गुरुदेव भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

गुरुजी चिंता बुरी बला बता दो जाएगी कैसे,

बता दो जाएगी कैसे बता दो जाएगी कैसे,

गुरुजी चिंता बुरी बला....

गंगा भी नहाई मैं तो जमुना भी नहाई,

गई ना गोता लगाने से गई ना गोता लगाने से,

गुरुजी चिंता बुरी बला.....

ब्याह करवाया मैंने गोना करवाया,

गई ना घुंगटा निकाले से गई ना घूंघटा निकाले से,

गुरुजी चिंता बुरी बला....

बेटी भी जाई मैंने बेटा भी जाया,

गई ना गौद खिलाने से गई ना गौद खिलाने से,

गुरुजी चिंता बुरी बला.....

बेटी भी ब्याही मैंने बेटा भी ब्याहा,

गई ना दान कराने से गई ना दान कराने से,

गुरुजी चिंता बुरी बला......

चुन चुन लकड़ी चिता बनाई,

चली गई आग लगाने से चली गई आग लगाने से,

गुरुजी चिंता बुरी बला......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।