तुम मिले दिल खिले ,मुझे साथ तेरा चाहिए

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - तुम मिले दिल खिले

तू मिले दिल खिले, मुझे साथ तेरा चाहिए,

मेरी है ये आस मुझे तेरे पास तू रखेगा जिंदगी भर,

चलना संग मेरे बाबोसा, बनकर तू ही साया,

तू मिले दिल खिले, मुझे साथ तेरा चाहिए.....

बाबोसा मेरे बाबोसा.. मेरे बाबोसा...

अब न मुझे कोई राह नज़र नही आती है,

बिन माझी हो... मेरी नैया मजधार डूब जाती है,

तुम्हारे बिना कोई नही..

इस जहाँ में बाबा दूजा कोई नजर न आया,

तू मिले दिल खिले, मुझे साथ तेरा चाहिए.....

बाबोसा मेरे बाबोसा.. मेरे बाबोसा...

ये सांसे चले हो.. जब तक मेरी, भूलूँ न में तुझे,

तू साथ है हो.. मेरे बाबा अब कोई गम न मुझे

कहे ‘मनोज’ ओ मेरे दिलबर..

मेरे मन की मुरादे, पूरी करदो जो लाया,

तू मिले दिल खिले, मुझे साथ तेरा चाहिए.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।