दे दे प्यार दे रे हमे प्यार दे

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - दे दे प्यार रे हमे प्यार दे

( हम दीवाने है तेरे द्वार के, ओ बाबोसा महाराज,

हा..हरपल अपने भक्तो की, तू ही बचाये लाज। )

दे दे प्यार दे...

दे दे प्यार दे, प्यार दे, प्यार दे रे, बेशुमार दे,

बड़ी दूर से चलकर आये प्यार तुम्हारा पाने,

बाबोसा हम तेरे दीवाने, माने या न माने,

दे दे प्यार दे...

दे दे प्यार दे, प्यार दे, प्यार दे रे, बेशुमार दे......

तेरे द्वार पे आके बाबा, एक टक तुझको निहारे,

नजर कृपा की डाल के बाबा, कर दो वारे न्यारे,

प्रेम प्यार सुख चैन की बरखा तेरी नजर से बरसे

प्यार बिन कोई खाली न जाये, आज इस दर से,

दे दे प्यार दे...

दे दे प्यार दे, प्यार दे, प्यार दे रे, बेशुमार दे......

भक्तो पर अपना प्यार लूटाकर, सोये भाग्य जगा दे,

सिर पे हाथ घुमाकर बाबा, दुख दर्द सारे मिटा दे,

बड़े दिनों के बाद "दिलबर" आई है मेरी बारी,

शैलू संग भक्तो पर बाबा हो जाये महर तुम्हारी,

दे दे प्यार दे...

दे दे प्यार दे, प्यार दे, प्यार दे रे, बेशुमार दे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।