चले गये सतगुरू कौंंन से जहांन में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चले गये सतगुरू, कौंंन से जहांन में

रहता है कैसे शिष्य,गुरू बिन जहांन में

डुडंता फिरूं उन्हें में,अब कहां कहां में

चले गये सतगुरू....

गलि कुचे डुंड फिरा,पाया पता ना

चले गये कौंन देस,हमको पता ना

छोड़ मझधार फिर भी, रख़ा ख़्याल है

चले गये सतगुरू....

श्यामा श्याम रटते रटते, जीवन की शाम आई

अन्तं समय में मेरे, यही गंगा काम आई

रसिका को पागल, बनाया इस जहांन में

चले गये सतगुरू....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।