पापा मेरे पापा

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॥ पावन पाठ ॥

पापा मेरे पापा सबसे प्यारे पापा,

सदा रहो यू ही हंसते आएं ना बुढापा,

पापा मेरे पापा सबसे प्यारे पापा.....

अपने बच्चों की खातिर तुम कितनी मेहनत करते हो,

कभी कभी खुद भूखा रहकर पेट हमारा भरते हो,

गुस्से में नाराज़ हुए तो खोया नहीं आपा,

पापा मेरे पापा सबसे प्यारे पापा.....

पल पल अपना गंवा के तुमने जोड़ा पाई पाई को,

अच्छी शिक्षा भी दिलवाई हम बहनों और भाई को,

ब्याह शादी में खर्चा करके दिल ना जिनका कांपा,

पापा मेरे पापा सबसे प्यारे पापा.....

जब भी हमने पैसे मांगे कभी नहीं इंकार किया,

पाल पोस कर बड़ा किया और दुनिया भर का प्यार दिया,

तुमने बच्चों की इच्छा को पल भर भांपा,

पापा मेरे पापा सबसे प्यारे पापा.....

सदा सुखी रहे मेरे पापा है अभिलाषा सागर,

तब तक नाम रहे दुनिया जब तक किरणें सूरज की,

कहे अनाड़ी सदा शीश पर चम चम चमके शाफा,

पापा मेरे पापा सबसे प्यारे पापा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।