साई बाबा तुझपे हमे ऐतबार

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॥ पावन पाठ ॥

साई बाबा तुझपे हमे ऐतबार,

साई बाबा तुझपे हमे ऐतबार,

रहेगा तेरा यूँही हमपे ये प्यार,

रहेगा तेरा यूँही हमपे ये प्यार,

तुझे चाहने वाले है बेशुमार,

तुझे चाहने वाले है बेशुमार,

सभी के लिए है खुले तेरे द्वार,

रहेगा तेरा यूँही हमपे ये प्यार।

शिरडी में नित रोग कई धर्मो के आते,

आ तेरे दरबार में सब शीश नवाते,

शिरडी में नित रोग कई धर्मो के आते,

आ तेरे दरबार में सब शीश नवाते,

रंक या राजा में नहीं भेद यहाँ पे,

तेरी नज़र में है सभी एक यहाँ पे,

जैसे कर्म हो, हो वैसे फल मिले,

है जुदा जुदा सबकी मंज़िले,

तुझको ध्याये उनको होती नहीं है हार,

साई बाबा तुझपे हमे ऐतबार,

साई बाबा तुझपे हमे ऐतबार,

रहेगा तेरा यूँही हमपे ये प्यार,

सभी के लिए है खुले तेरे द्वार।

साई तेरे नाम का जो लेते सहारा,

डूबे ना मजधार मिले पाए किनारा,

साई तेरे नाम का जो लेते सहारा,

डूबे ना मजधार मिले पाए किनारा,

साईनाथ जो भी तुझे दिल से पुकारे,

उसके दयावान तुम्हे बिन है सुधारे,

धुप छाव को खेले ज़िन्दगी,

करनी है हमे तेरी बंदगी,

सूनी ज़िन्दगी में लाया है तू बहार,

साई बाबा तुझपे हमे ऐतबार,

साई बाबा तुझपे हमे ऐतबार,

रहेगा तेरा यूँही हमपे ये प्यार,

सभी के लिए है खुले तेरे द्वार,

तुझे चाहने वाले है बेशुमार,

तुझे चाहने वाले है बेशुमार,

रहेगा तेरा यूँही हमपे ये प्यार,

रहेगा तेरा यूँही हमपे ये प्यार......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।