आया है आया नव वर्ष आया

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॥ पावन पाठ ॥

आया है आया नव वर्ष आया,

भक्तों को दाता ने दर्शन दिखाया॥

हर कोई प्रभु को निहारता,

क्या कहना दाता के प्यार ,

का सुंदर सजे दरबार का,

आया है आया नव वर्ष आया,

भक्तों को दाता ने दर्शन दिखाया॥

इस साल होगा प्रभु का दीदार,

प्रभु किस्मत सवारे आज,

झोली भरेंगे किस्मत लिखेंगे,

कृपा बरसाए दातार,

दुख तेरे हर लेंगे झोली भर देंगे,

ऐसे दयालु महाराज,

भागतो के अपने संकट मिटाए,

क्या कहना सच्ची सरकार का,

क्या कहना दाता के प्यार का,

सुंदर सजे दरबार का.....

सुंदर सा चोला है सुंदर सा रूप है,

यहां बिराजे महाराज,

करते ही दर्शन होगा प्रसन्न मन,

किस्मत सवारी है आज,

जो भी मेरे दाता की ज्योत जगाये,

वो अपना जीवन से सवारता,

क्या कहना दाता के प्यार का,

सुंदर सजे दरबार का.....

कोई ना दाता के दर से नाराज जाए,

सबकी सुनते है दाता,

निर्धन को धन देती निर्बल,

को बल देती आस पुरी करते दातार,

चरणों में प्रभु के सर को झुकाए,

हर पल तुझे ही पुकारता,

क्या कहना दाता के प्यार का,

सुंदर सजे दरबार का......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।