मत प्रेम करो इस काया से

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मत प्रेम करो इस काया से एक दिन तो दगा दे जाएगी,

एक दिन तो दगा दे जाएगी, एक दिन तो दगा दे जाएगी,

मत प्रेम करो इस काया से एक दिन तो दगा दे जाएगी॥

भैया बहना सब मतलब के कोई ना साथ निभाएगा,

जब वक्त पड़ेगा वो भैया कोई ना साथ में जाएगा,

मत प्रेम करो इस काया से एक दिन तो दगा दे जाएगी॥

यह महल दुमहला छोड़ो तुम, मरघट की अब तुम याद करो,

जब आग लगेगी इस तन में, सब ख़ाक राख हो जाएगी,

मत प्रेम करो इस काया से एक दिन तो दगा दे जाएगी॥

मत प्यार करो परदेसी से, एक दिन तो दगा दे जाएंगे,

तुम ढूंढ ना पाओगे हमको, हम जाने कहां खो जाएंगे,

मत प्रेम करो इस काया से एक दिन तो दगा दे जाएगी॥

जब तक है तन में सांस तेरे, तब तक सब तेरा तेरा है,

उड़ गया पंछी रह गई काया फिर कुछ ना यहां पर तेरा है,

मत प्रेम करो इस काया से एक दिन तो दगा दे जाएगी॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।