प्यार में तेरे सांवरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( तू मेरी श्रधा, मेरा विश्वावस तू है,

मेरी चाहतें, मेरी प्यास तू है,

तू मेरे सामने ना आये तो क्या,

लगता है मुझे मेरे आस पास तू है। )

प्याार में तेरे, सांवरिया,

मैने ये जमाना छोड़ दिया,

जो राह तेरे दर से ना मिले,

उस राह पे जाना छोड़ दिया॥

अब तेरी दया बिन हे दाता,

मेरी किस्मत कुछ ऐसी थी,

जैसे गुलशन के फूलों ने,

हंसना मुस्काना छोड़ दिया,

जो राह तेरे दर से ना मिले,

उस राह पे जाना छोड़ दिया॥

बस एक ठिकाना श्याम तेरा,

रहता तू दुखी के सीने में,

मैं और कहॉं ढूंढूंगा तुम्हें,

गर ये भी ठिकाना छोड़ दिया,

जो राह तेरे दर से ना मिले,

उस राह पे जाना छोड़ दिया॥

मन जाये जहां तू ही हो वहां,

सर झूके तो पद हो तेरे ही,

‘गजे सिहं’ ने सर अब श्याम सिवा,

कहीं और झुकाना छोड़ दिया,

जो राह तेरे दर से ना मिले,

उस राह पे जाना छोड़ दिया॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।