झंडा जुले जोगीया वे तेरा लाल गुलाबी

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॥ पावन पाठ ॥

झंडा झूले जोगीया वे तेरा लाल गुलाबी,

झंडा झूले जोगीया वे तेरा लाल गुलाबी॥

चोही कुंठी झूले झंडा नाले धुम्मा पावे,

झूल झूल पावे दिल नू खींचा नाले मस्त बनावे,

गौंदे फिरदे नाम दीवाने होके मस्त शराबी,

झंडा झूले जोगीया वे तेरा लाल गुलाबी॥

झिलमिल करदा झंडा तेरा ऊंचिया शाना वाला,

वेखे जो भी रंग ए सूहा हो जावे मतवाला,

कटदा सबदे रोग पुराने दूर करे खराबी,

झंडा झूले जोगीया वे तेरा लाल गुलाबी॥

घर घर झूले झंडा तेरा मां रत्नों दे पाली,

बारह वर्षा चारियां गयियां होके जग दा वाली,

कलयुग दा है राखा तुहिओ हथ तेरे है चाबी,

झंडा झूले जोगीया वे तेरा लाल गुलाबी॥

पूजा करदा ‘यू पी सी पी’ मान करे मद्रासी,

तरले पावन राजस्थानी आ गुफा दे वासी,

पौनाहारी उडदा आवे गौण जीथे पंजाबी,

झंडा झूले जोगीया वे तेरा लाल गुलाबी॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।