धन्यवाद हो क्रूस के लिए

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॥ पावन पाठ ॥

धन्यवाद हो क्रूस के लिए,

धन्यवाद जो दाम तू ने दिया,

उठाया मेरा पाप और लाज,

आया प्यार में तू, दिया अद्भुत अनुग्रह।

धन्यवाद इस प्रेम के लिए,

धन्यवाद उन घावों के लिए,

धोया मुझे लहू से, पहचानूँ अब,

तेरी क्षमा और तेरा प्रेम।

धन्य है मेमना,

सिहांसन पर विराजमान,

महिमा से घिरा हुआ,

जयवन्त हुआ मेमना।

उठाते तेरा नाम,

ख़ुदा का तू बेटा,

स्वर्ग का प्रिय क्रूसित हुआ,

धन्य है मेमना....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।