तेरा प्रेम मेरे प्रभु

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॥ पावन पाठ ॥

समुंदरों की गहराइयों से भी ज्यादा,

पहाड़ों की ऊंचाइयों से भी बढ़कर,

तेरा प्रेम मेरे प्रभु, तेरा प्रेम मेरे यीशु....

राख से उठाकर यीशु नाम के चट्टान पे खड़ा किया,

दूरियां मिटाकर पाप की तूने पंखो तले छुपा लिया,

तेरा प्रेम मेरे प्रभु, तेरा प्रेम मेरे यीशु.....

तेरे प्यार में मुझे डूबा दे,

तेरे चेहरे को देखूं आज,

तेरी सीरत मुझ में बसा दे, खुद सा मुझे बना,

खुद सा मुझे बना....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।