येशुआ तू ही मेरे साथ है

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॥ पावन पाठ ॥

जो पानी पर चला,

तुफानो को शांत किया,

जीवित प्रभु है जो,

वो मेरे संग रहता सदा,

येशुआ तू ही मेरे जान है,

येशुआ तू ही मेरे दिल में है,

येशुआ तू ही मेरे साथ है,

येशुआ....

मेरे कारण वो मर गया,

फिर मेरे लिये जी उठा,

पापो को साफ करने,

सूली पर कुर्बान हुआ,

येशुआ तू ही मेरे जान है,

येशुआ तू ही मेरे दिल में है,

येशुआ तू ही मेरे साथ है,

येशुआ....

बादलों के बीच में,

और मेघों के गर्जन में,

राजाओं का राजा ही,

करेगा राज ब्रह्माण्ड पे,

येशुआ तू ही मेरे जान है,

येशुआ तू ही मेरे दिल में है,

येशुआ तू ही मेरे साथ है,

येशुआ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।