मिट्टि मिट्टी में मिलती है जिस पल

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॥ पावन पाठ ॥

मिट्टि मिट्टी में मिलती है जिस पल,

रब्ब से मिलती मेरी रूह उस पल,

है बना जो भवन मेरे वास्ते,

वहाँ होंगे ना ग़म इस जहाँ के,

स्वर्ग में... संग येशु के॥

कठिनाई में दी तस्सल्ली मुझे,

दिल के करीब उसने रखा मुझे,

छाया ढ़के, मेरे रास्ते,

शम्मा को भुजने न दिया उसने,

इस जग में रहेंगे ना अब दिन अँधेरे,

अपनी इनायत से जोड़ा मुझे, मिलाया मुझे,

मिट्टि मिट्टी में मिलती है.....

इक रोज़ वो बड़े प्रेम से,

सौंपा रेहम से वचनों को मुझे,

बहा जो लहू, उस क्रूस पे,

भरता है ऐसी आशा से मुझे,

अब मेरी ज़िन्दगी संग तेरे ही मसीह,

करता हूँ इस जग से मैं अल्विदा, मैं अल्विदा,

मिट्टि मिट्टी में मिलती है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।