रट ले हरि का नाम रे प्राणी

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

रट ले हरि का नाम रे,

प्राणी रट ले हरि का नाम,

सब छोड़ दे उल्टे काम रे,

प्राणी छोड़ दे उल्टे काम रे,

बैरी रट ले हरि का नाम......

जिस दौलत पर तुझे है भरोसा,

जिस दौलत पर तुझे है भरोसा,

जाने कब तुझे दे जाये धोखा,

ये लुट जाये सरेआम रे,

ये लुट जाये सरेआम रे,

बैरी रट ले हरि का नाम.....

देख क्यों हँसता सुंदर काया,

देख क्यों हँसता सुंदर काया,

चिता बीच जब जाए जलाया,

तेरा माँस रहेगा ना चाम रे,

तेरा माँस रहेगा ना चाम रे,

बैरी रट ले हरि का नाम.....

पाप करे और गँगा नहाए,

पाप करे और गँगा नहाए,

किससे तू अपने पाप छुड़ाए,

तेरा होगा बुरा अंजाम रे,

तेरा होगा बुरा अंजाम रे,

बैरी रट ले हरि का नाम.....

मथुरा और काशी जाने से,

मथुरा और काशी जाने से,

भजन कीर्तन करवाने से,

तुझे नहीं मिलेगा आराम रे,

तुझे नहीं मिलेगा आराम रे,

बैरी रट ले हरि का नाम.....

राम नाम से तू निकला बच कर,

राम नाम से तू निकला बच कर,

मोह माया के जाल में फंसकर,

हो गया आज गुलाम रे,

तू हो गया आज गुलाम रे,

बैरी रट ले हरि का नाम.....

पता लगा पहले ब्रह्म ज्ञान का,

पता लगा पहले ब्रह्म ज्ञान का,

ब्रम्हा नन्द तू किसी रे नाम का,

ढूंढ ले ठीक मकाम रे,

तू ढूंढ ले ठीक मकाम रे,

बैरी रट ले हरि का नाम.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।