सुमर मनवा

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॥ पावन पाठ ॥

सुमर मनवा,

सुमर मनवा,

सुमर मनवा,

सुमर मनवा, सुमर मनुवा,

सुमर रे पञ्च तत्त्व सुविचार,

सुमर मनवा सुमर मनुवा,

सुमर रे पञ्च तत्त्व सुविचार....

घट घट भीतर जग में निरंतर,

नाग ब्रह्म साकार,

सुन लो प्रणम की दिव्य पुकार,

सुमर मनुवा सुमर मनुवा,

सुमर रे पञ्च तत्त्व सुविचार.....

मेरा मेरा कुछ नहीं तेरा,

छोड़ दो अहंकार,

पालो सास्वत सोख्य अपार,

सुमर मनवा सुमर मनवा,

सुमर रे पञ्च तत्त्व सुविचार.....

तरन और फल करम भाग्य का,

समर लो बारम बार,

सुन लो धर्म चक्र झंकार,

सुमर मनवा सुमर मनवा,

सुमर रे पञ्च तत्त्व सुविचार.....

चन्द्र कोर का चले सहारा,

करे सितारा एक आधार,

मानो श्रद्धा का ये सार,

सुमर मनवा सुमर मनवा,

सुमर रे पञ्च तत्त्व सुविचार.....

आओ जलादो यज्ञ अग्नि में,

ये कटु विषय विकार,

कर लो देवी साक्षात्कार,

सुमर मनवा सुमर मनवा,

सुमर रे पञ्च तत्त्व सुविचार,

सुमर मनवा सुमर मनवा,

सुमर रे पञ्च तत्त्व सुविचार.....

ये सुप एत्य का प्रेम धरम का,

सत्य शांति का द्वार,

सन्देश भव्य दे मंत्र दिव्य दे,

साई नाथ अवतार,

जय जय साई नाथ अवतार

जय जय साई नाथ अवतार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।