राम जी से कहना में लंका ना रहूं

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

वीर हनुमाना मैं तुमसे कहूं,

राम जी से कहना मैं लंका ना रहूं.....

इस लंका में बाग बहुत है,

बागो की मालिन मैं ना बनू,

राम जी से कहना मैं लंका ना रहूं.....

इस लंका में महल बहुत है,

महलों की रानी मैं ना बनू,

राम जी से कहना मैं लंका ना रहूं.....

इस लंका में समुंदर की धारा,

समुंदर की मछली में ना बनू,

राम जी से कहना मैं लंका ना रहूं.....

इस लंका में बड़े बड़े योद्धा,

तुम सांवली में ना देखूं,

राम जी से कहना मैं लंका ना रहूं.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।