राम जैसा नगीना नहीं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन राम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राम जैसा नगीना नहीं,

सारे जग की बजरिया में,

नीलमणि ही जड़ाऊँगी,

अपने मन की मुंदरियाँ मे,

राम जैसा नगीना नही,

सारे जग की बजरिया में॥

राम का नाम प्यारा लगे,

रसना पे बिठाऊँगी मैं,

मृदु मूरत बसाऊँगी,

नैनों की पुतरिया में,

राम जैसा नगीना नही,

सारे जग की बजरिया में॥

है झूठे सभी रिश्ते,

और झूठे सभी नाते,

दूजा रंग न चढ़ाऊँगी,

अपनी श्यामल चदरिया में,

राम जैसा नगीना नही,

सारे जग की बजरिया में॥

जल्दी से जतन करके,

राघव को रिझाना है,

कुछ दिन ही तो रहना है,

काया की कोठरिया में,

राम जैसा नगीना नही,

सारे जग की बजरिया में.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।