माँ का है वो धाम

पारंपरिक
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

एक जगह है जहाँ पे भक्तो,

एक जगह है जहाँ पे भक्तो मन को मिले आराम,

खुशियों का है जहाँ बसेरा गम का ना कोई नाम,

शेरावाली जोतावाली माँ का है वो धाम,

माँ का है वो धाम,

माँ का है वो धाम......

ये पंछी, ये बादल,

ये पंछी, ये बादल बोले ये गंगा के धारे,

माँ के जयकारे...-4

ये पंछी, ये बादल,

ये पंछी, ये बादल बोले ये गंगा के धारे,

माँ के जयकारे...-4

जगती है दिन रात ये ज्योति,

ये ना कभी भी सोई,

पत्थर से हीरा कर दे माँ,

जिसपे मेहरबान होई,

छू के माँ के चरणों को ये सूरज पंख पसारे,

माँ की भक्ति में डूबे ये बोले चाँद सितारे,

चाँद सितारे चाँद सितारे,

माँ के जयकारे...-4

प्रसाद पहले मैया तुझको चढ़ाये,

भर पेट फिर मैया हमने भी खाया,

भेट तेरी गयी मैया बड़ा मज़ा आये,

मेहेरबानी तेरी माँ जो हमको बुलाया,

शेरावाली, मेहरावाली, लाटावाली, ज्योतावाली,

शेरावाली, मेहरावाली, लाटावाली, ज्योतावाली,

जय माँ जय माँ....-8

जय माँ जय माँ बोलो सदा तुम,

ना इसको बिसराना,

दुःख को सुख में बदले मैया,

ये है सभी ने माना,

माँ जगदम्बे सबकी प्यारी और हम उसके प्यारे,

एक ही सूज में एक ही लय में मिलके बोलो सारे,

माँ के जयकारे....-4

ये पंछी ये पंछी ये बादल ये बादल,

ये पंछी, ये बादल बोले ये गंगा के धारे,

माँ के जयकारे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।