आओ बाबा जी राता हो गैइया चांईंया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

आज साडी भी गली विच आओ बाबा जी राता हो गैइया चांईंया

आज राता हो गाइया चांईंया, बाबा राता हो गाइया चांईंया

आज साडी भी गली विच आओ बाबा जी राता हो गैइया चांईंया ॥

राल मिल भागता ने जगन रचाया

सोने सोने फूला नाल भवन सजाया ,

भवन सजाया ...... ॥

साड़े जग विच वेरा पाओ बाबा जी

आज बचैया ने खुशिया मानवनिया

आज साडी भी गली जय हो आज साडी भी गली ...... ॥

पंजा दरयावा दा जल मंगवाया,

चरण धुलवाने सारा जग आया ॥

सारे देवते कारन उडीका जोगिया॥

आज सांगता बाबे ने तरनीया

आज साडी भी गली जय हो आज साडी भी गली॥

एहो जइया आके बाबा मेहरा बरसादेयो,

कर देयो निहाल जोगी,

केहरा चोली पा देयो॥

ऐसी नाम वाली चढ़ी अज्ज होड़ जोगिया

आज नच नच हज़ारिया लगावनिया

आज साडी भी गली जय हो आज साडी भी गली ॥

अशी है नादान बाबा करम कमालेयो,

सूरा ते ध्यान दा ज्ञान झोली पा देयो ॥

ऐसी भेटा ते संगत गांदी रवये

जेडी मन विच वसदिया जावडिया

आज साडी भी गली जय हो आज साडी भी गली ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।