राधिके यूँही जमुना पे आती रहो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधिके यूँही जमुना पे आती रहो,

बाहों के झूले में मैं झुलाता रहू,

काली काली घटा में कोयल की तरह तुम भी गाती रहो,

मैं भी गाता रहू,

ये तेरा दिल है मेरी मंज़िल है,

ये तेरा दिल है मेरी मंज़िल है,

इससे मैं ज़्यादा अब क्या कहू,

सांवरे यूँही जमुना पे आते रहो,

बाहों के झूले में मैं झुलाती रहू,

काली काली घटा में कोयल की तरह तुम भी गाते रहो,

मैं भी गाती रहू,

ये तेरा दिल है मेरी मंज़िल है,

ये तेरा दिल है मेरी मंज़िल है,

इससे मैं ज़्यादा अब क्या कहू,

राधिके यूँही जमुना पे आती रहो,

बाहों के झूले में मैं झुलाता रहू।

तुम्हे मुरली सुनाने से तुम्हे अपना बनाने से,

तुम्हे दिल की बताने से दूर होते है गम,

मुझे भी चैन होता है मेरा मन मुस्कुराता है,

तू जब मुरली बजाता है तो खुश होते है हम,

बात बिलकुल है ये अच्छी लगन मेरी भी है सच्ची,

राधिके यूँही जमुना पे आती रहो,

बाहों के झूले में मैं झुलाता रहू।

है जब तक दम मेरा दे दम यूँही मिलते रहेंगे हम,

ना करना प्यार कभी ये कम यही है वादा,

तेरा ही तो ये तन मन है सदा तुझको समर्पण है,

तू ही राधा का मोहन है, है तेरी राधा,

तेरा ये साथ ना छूटे तेरा ये हाथ ना छूटे,

राधिके यूँही जमुना पे आती रहो,

बाहों के झूले में मैं झुलाता रहू,

काली काली घटा में कोयल की तरह तुम भी गाते रहो,

मैं भी गाती रहू,

ये तेरा दिल है मेरी मंज़िल है,

इससे मैं ज़्यादा अब क्या कहू,

सांवरे यूँही जमुना पे आते रहो,

बाहों के झूले में मैं झुलाती रहू।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।