कृष्ण गोविन्द गोविन्द गोपाल नन्दलाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कृष्ण गोविन्द गोविन्द, गोपाल नन्दलाल,

कृष्ण गोविन्द गोविन्द, गोपाल नन्दलाल ll

हे गोपाल नन्दलाल, गोपाल नन्दलाल,

गोपाल नन्दलाल, हे गोपाल नन्दलाल l

कृष्ण गोविन्द गोविन्द, गोपाल नन्दलाल,

कृष्ण गोविन्द गोविन्द, गोपाल नन्दलाल ll

वो बदन मयंक वारो, मोहे धनुवंक वारो l

वो टेढ़ी सी लंक वारो, रूप उजियारो है l

वो लोचन विशाल वारो, गलमणि माल वारो ll

वो मस्त गज चाल वारो, जग से निहारियो है ll

वो पीत-पट पेट वारो, मधु भरी सेंट वारो l

वो लाल बलवीर प्यारो, करत नटारियो है l

वो मोर की मुकुट वारो, टेढ़ी सी लकुट वारो ll

वो टेढ़ी टांग वारो कृष्ण, देवता हमारो है l

वो टेढ़ी टांग वारो कृष्ण साहिब हमारो है l

कृष्ण गोविन्द गोविन्द,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

भजूँ तो गोपाल इक, सेवूँ तो गोपाल इक l

हो,,, मेरो मन लगयो सब, भाँती नन्दलाल सो l

मेरे देवी देव गुरू, मात-पिता बन्धु इष्ट ll

हो,,, मित्र सखा नातो सब, इक गोपाल सो ll

हरिशचन्द्र और सोना, कछु सम्बन्ध मेरो l

हो,,, आश्रय सदा इक, लोचन विशाल सो l

जो मांगु तो गोपाल सोना, मांगु तो गोपाल सो ll

जो रिझु तो गोपाल सो, खिझु तो गोपाल सो ll

कृष्ण गोविन्द गोविन्द,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

मेरा श्याम मयंक, मन हो चुका है l

*वो जान हो चुका है, जिगर हो चुका है l

ये सच मानिये उसकी, हर इक अदा पर ll

जो भी पास था सब, नजर हो चुका है ll

कृष्ण गोविन्द गोविन्द,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।