हम है तेरे दर के जोगी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हम है तेरे दर के जोगी

तेरे दर्शन के है लोभी

कब तेरी करुणा होगी

हे भोले

खाली हमको मोड़ ना देना

भक्तो का दिल तोड़ ना देना

हाथ हमारा छोड़ ना देना

हे भोले

हम है तेरे दर के जोगी

तेरे दर्शन के है लोभी

कब तेरी करुणा होगी

हे भोले

खाली हमको मोड़ ना देना

भक्तो का दिल तोड़ ना देना

हाथ हमारा छोड़ ना देना

हे भोले

तेरे दर खड़े झोली फैला कर

तेरे दर खड़े झोली फैला कर

हे भोले शंकर, हे अभयंकर

हे भोले शंकर, हे अभयंकर

आये है बड़ी आस लगा कर

आये है बड़ी आस लगा कर

हे भोले शंकर, हे अभयंकर

हे भोले शंकर, हे अभयंकर

तेरे दर खड़े झोली फैला कर

तेरे दर खड़े झोली फैला कर

हे भोले शंकर, हे अभयंकर

हे भोले शंकर, हे अभयंकर

हे महादेव, हे गंगाधरी

सुन भी लो जल्दी विनती हमारी

तुमने तो हमसे करोडो को तारा

हम भी तो धरते है ध्यान तुम्हारा

माथे पे आधा चाँद सजा कर

देदो सहारा हमे हाथ बढ़ा कर

हाँ हे महाकाल प्रभु अंतर्यामी

तुम हो सारे विश्व के स्वामी

पूरी करो हर मन की आशा

हर लो दाता सबकी निराशा

ओ कहते बेल की पत्तिया चढ़ा कर

कहते बेल की पत्तिया चढ़ा कर

हे भोले शंकर, हे अभयंकर

हे भोले शंकर, हे अभयंकर

तेरे दर खड़े झोली फैला कर

तेरे दर खड़े झोली फैला कर

हे भोले शंकर, हे अभयंकर

हे भोले शंकर, हे अभयंकर

तुम दयालु दुःख हर्ता हो दाता

तुम ही हो सबके भाग्यविधाता

तुम ही काँटो को फूल बनाते

तुम ही भक्तो के कष्ट मिटाते

हमे भी तुमपे भरोसा है पूरा

रहने ना दोगे कोई काम अधूरा

देखो इधर हे भस्मरमैया

तेरे हवाले है ये जीवन नैया

छोड़ के हमने जहां ये सारा

चुना है भोले बाबा धाम तुम्हारा

देदो हर सुख पास बुला कर

देदो हर सुख पास बुला कर

हे भोले शंकर, हे अभयंकर

तेरे दर खड़े झोली फैला कर

हे भोले शंकर, हे अभयंकर

आये है बड़ी आस लगा कर

हे भोले शंकर, हे अभयंकर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।