हित तो कीजे कमल नयन सौ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हित तो कीजे कमल नयन सौ,

हित तो कीजे कमल नयन सौ,

या हित आगे सब हित लागे फीको,

या हित आगे सब हित लागे फीको,

कमल नयन सौ,

हित तो कीजे कमल नयन सौ,

हित तो कीजे कमल नयन सौ.....

हरी को हित जैसे रंग मजिख,

हरी को हित जैसे रंग मजिख,

जगत को हित,

जगत को हित,

कुसुम्ब दिन द्विको,

कमल नयन सौ,

हित तो कीजे कमल नयन सौ,

हित तो कीजे कमल नयन सौ.....

या हित कीजे साधु संगत सौ,

या हित कीजे साधु संगत सौ,

जावे कल विक,

जावे कल विक जीको,

कमल नयन सौ,

हित तो कीजे कमल नयन सौ,

हित तो कीजे कमल नयन सौ.....

कहे हरिदास हित कीजे बिहारी सौ,

कहे हरिदास हित कीजे बिहारी सौ,

और निभावे,

और निभावे जाणे जीको,

कमल नयन सौ,

हित तो कीजे कमल नयन सौ,

हित तो कीजे कमल नयन सौ.....

या हित आगे सब हित लागे फीको,

या हित आगे सब हित लागे फीको,

कमल नयन सौ,

हित तो कीजे कमल नयन सौ,

हित तो कीजे कमल नयन सौ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।