गणपती मूरत बस गई

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गणपती मूरत बस गई जेह मन पार उतर गयो सोय,

गणपती मूरत बस गई जेह मन पार उतर गयो सोय,

अपनी धुन में होय रहत फिर चाहे जो भी हो,

गणपती मूरत बस गई जेह मन पार उतर गयो सोय।

ऐसा नही है जग में,

ऐसा नही है जग में जैसा कष्ट विनाशन है ये,

मंगल दाता शुभगण कानन रूप गजानन है ये,

ज्ञानी ध्यानी अंतर्यामी जाने ये कोय,

गणपती मूरत बस गई जेह मन पार उतर गयो सोय।

सेवा करे जो इसकी,

सेवा करे जो इसकी पा लेता है मुक्ति धाम,

आज नही तो कल हो जाये जग में उसका नाम,

इसके चरणामृत के जल से अपने मन को धोय,

गणपती मूरत बस गई जेह मन पार उतर गयो सोय।

पूजा करे सब इसकी,

पूजा करे सब इसकी गाये गीत नये राहो में,

जब जब आये गणपती उत्सव धूम मचे राहो में,

मन की इच्छा कर दे पूरी जाये ना खाली कोय,

गणपती मूरत बस गई जेह मन पार उतर गयो सोय,

गणपती मूरत बस गई जेह मन पार उतर गयो सोय....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।