पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा,

बजावे भोले बाबा बजावे भोले बाबा...

डमरू की धुन सुन ब्रह्मा जी आए,

नारद मुनि को नचावे भोले बाबा,

पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा.....

डमरू की धून सुन विष्णु जी आए,

सारे देवो को नचावे भोले बाबा,

पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा.....

गणपति नाचे कार्तिक नाचे,

नंदी को संग में नचावे भोले बाबा,

पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा.....

ऋंगी भींगी श्रृंगी नाचे,

ऋषि मुनियों को नचावे भोले बाबा,

पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा.....

नर और नार सभी है नाचे,

भूतो और प्रेतों को नचावे भोले बाबा,

पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा....

अपनी ही धुन में भोले मगन है,

सारी सृष्टि को नचावे भोले बाबा,

पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।