भोले बाबा आए ब्रज में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले बाबा आए ब्रज में,

वह तो घूमे गलीन गलीन में....

ये नंद जी के द्वार खोलो खोलो मैया द्वार,

हम देखें तेरे ललन ने,

वह तो घूमे गलीन गलीन में,

भोले बाबा आए ब्रज में.....

मेरो छोटो सो गोपाल तेरा रूप विकराल,

डर जाएगा लाल मेरो पल में,

वह तो घूमे गलीन गलीन में,

भोले बाबा आए ब्रज में.....

मैया तेरो नंदलाल तू ना जाने इसको राज,

वह तो नाच नचावे एक पल में,

वह तो घूमे गलीन गलीन में,

भोले बाबा आए ब्रज में.....

कान्हा लीला दिखावे भोले डमरु बजावे,

सब देव हंसे मन मन में,

वह तो घूमे गलीन गलीन में,

भोले बाबा आए ब्रज में.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।