तन मन दिया है साई

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तन मन दिया है साई,

जीवन तू ही तो देगा,

तन मन दिया है साई,

जीवन तू ही तो देगा।

आँखें दे रौशनी भी,

आँखें दे रौशनी भी,

दर्शन तू ही तो देगा,

तन मन दिया है साई,

जीवन तू ही तो देगा।

है तात मात तू ही,

भ्राता सखा भी है तू ही,

है तात मात तू ही,

भ्राता सखा भी है तू ही,

प्रित्यार धन भी तू है,

मेरा सब कुछ जग में तू ही,

मेरा सब कुछ जग में तू ही,

बुद्धि दी सोचने को,

बुद्धि दी सोचने को,

चिंतन तू ही तो देगा,

साई बाबा साई बाबा,

साई बाबा साई बाबा।

कर दे हमे तू पावन,

निर्मल हो मन का आँगन,

तन मन और धन से साई,

सेवा में तेरी अर्पण,

सेवा में तेरी अर्पण,

वीराने तू ही देता,

वीराने तू ही देता,

नंदन तू ही तो देगा,

तन मन दिया है साई,

जीवन तू ही तो देगा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।