भैया मेरे कैसे करूं सहाय

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

भैया मेरे कैसे करूं सहाई,

मुझे जैसे पापी के कारण तुमने बन में ठोकर खाई,

भैया मेरे कैसे करूं सहाई.....

मैं निर्भागी कर्म का हीना,

मुश्किल कर दिया मेरा जीना,

छल से राज भरत को दीना, दुनिया करे बुराई,

रे भैया मेरे कैसे करूं सहाई.....

रूठ गए उपवन के मालिक,

रूठ गई घर की खुशहाली,

खंडित पड़ी खीर की थाली, घर में बड़ी हसाई,

अरे भैया मेरे कैसे करूं सहाई.....

बालक पन में गोद खिलाया,

खुद हारे और मुझे जिताया,

मैं अपना और राम पराया, धन-धन केकई माई,

रे भैया मेरे कैसे करूं सहाई.....

गुरु गुणों की खान रहे ना,

सुखी रहे पुण्य दान रहे ना,

पाप पुण्य तो ले पनबढ़िया, हरी ना छोड़े एक पाई,

रे भैया मेरे कैसे करूं सहाई.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।