भोग ला लै ठाकरा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भोग ला लै भोग ला लै ठाकुरा,

बड़ा डाडा गुस्सा धन्ने जट्ट डा,

ओह ला लै प्रेम नाल भोग वे,

असा तेरा पीछा नहिओ छड़ना,

ओह भोग ला लै....

आज भगता ने ज़िद किती,

असा घर नही जाना ए,

तुसी खावो ते खावगे,

नही ता भूखे मर जाना ए,

ओह भोग ला लै....

पेड़े मखना दे खा खा के,

तू ते बिग्गड़ गयो शामा,

आज लस्सी ते ठोड़े दा,

साडा मान रखी शामा,

ओह भोग ला लै.....

सुन भगता दी अर्ज प्रभु,

रज भोग लगा लै वे,

अपने भगता नू आ कर के,

श्यामा दर्श दिखा दे वे,

ओह भोग ला लै....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।