शिव गौरा के मिलन का उत्सव

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव गौरां के मिलन का उत्सव, मिलकर सब मना लो,

सावन के महीने में, भोले के दर्शन पा लो....

देवों के हैं देव ये तो, भोले हैं भंडारी,

गौरां जी के संग में, विराजें त्रिपुरारी ।

शरण में आ के इनकी, चरणों में ध्यान लगा लो.....

सावन के महीने में.........

भक्ति की ज्योती अपने मन में जलायो,

जय हो भोलेनाथ जय हो महादेव गायो ।

होंगी मुरादें पूरी, तुम हमसे ये लिखवा लो......

सावन के महीने में.........

भक्तों के मन में क्या है, सब जानते हैं,

बोले बिना ही प्रभू, पहचानते हैं ।

डग मग नैया डोले (तो), शम्भु को मीत बना लो......

सावन के महीने में.........

बिना शिव की मर्जी के, फूल खिले ना,

इनके इशारे बिना, पत्ता भी हिले ना ।

"सदावर्तीया" शिव शंकर को मन में तुम बसा लो,

तीनों लोकों के स्वामी को मन में तुम बसा लो......

सावन के महीने में.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।