माता सबको प्यारी है

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

माता माता जय माता, माता माता जय माता

जय माता

माता सबको प्यारी है, माता सबको प्यारी है,

माता को सब प्यारे है, माता को सब प्यारे है...

माता सबको प्यारी है, माता को सब प्यारे है,

माता के दो नैनो में, माता के दो नैनो में,

सूरज चाँद सितारे है,

माता माता जय माता, माता माता जय माता....

माता सबको प्यारी है, माता सबको प्यारी है,

माता को सब प्यारे है, माता को सब प्यारे है,

माता के दो नैनो में, सूरज चाँद सितारे है,

माता सबको प्यारी है, माता सबको प्यारी है,

माता को सब प्यारे है, माता को सब प्यारे है.....

माता माता जय माता, माता माता जय माता,

सबके सर पे हाथ है तेरा,

माता माता जय माता, माता माता जय माता,

सबके सर पे हाथ है तेरा, सबके हाथ में आँचल तेरा,

तूने ही सब लोगो के बिगड़े काज सँवारे है.....

माता सबको प्यारी है, माता सबको प्यारी है,

माता को सब प्यारे है, माता को सब प्यारे है,

हो माता के दो नैनो में, सूरज चाँद सितारे है,

माता माता जय माता, माता माता जय माता,

माता माता जय माता, माता माता जय माता....

टूटे हुए मन के सपनो को, टूटे हुए मन के सपनो को,

ढूँढ रहे है हम अपनों को,

उनकी याद में रो रो के, उनकी याद में रो रो के,

कितने साल गुज़ारे है,

माता सबको प्यारी है, माता सबको प्यारी है,

माता को सब प्यारे है, माता को सब प्यारे है,

ओ माता के दो नैनो में, सूरज चाँद सितारे है,

माता माता जय माता, माता माता जय माता....

जोता वाली जय हो, शेरा वाली जय हो,

मौना वाली जय हो और लाटा वाली जय हो,

माता माता जय माता, माता माता जय माता,

माता माता जय माता, माता माता जय माता,

मंदिर में हम फूल चढ़ाते, हाँ ऐसे खली हाथ ना आते,

मंदिर में हम फूल चढ़ाते, ऐसे खली हाथ ना आते,

अपने पास मगर माता, फूल नहीं अंगारे है,

माता सबको प्यारी है, माता सबको प्यारी है,

माता को सब प्यारे है, माता को सब प्यारे है,

माता के दो नैनो में, सूरज चाँद सितारे है,

माता माता जय माता, माता माता जय माता,

मिलके बोलो जय माता, अरे सारे बोलो जय माता,

प्यार से बोलो जय माता, और ज़ोर से बोलो जय माता.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।