ॐ नमोजी आद्या

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

ॐ नमोजी आद्या । वेद प्रतिपाद्या ॥

जय जय स्वसंवेद्या । आत्मरूपा ॥1॥

देवा तूंचि गणेशु । सकळमति प्रकाशु ॥

म्हणे निवृत्ति दासु । अवधारिजो जी ॥2॥

अकार चरण युगुल । उकार उदर विशाल ॥

मकार महामंडल । मस्तकाकारें॥3॥

हे तिन्ही एकवटले । तेथें शब्दब्रह्म कवललें॥

ते मियां श्रीगुरुकृपें नमिलें । आदिबीज ॥4॥

आतां अभिनव वाग्विलासिनी । जे चातुर्यार्थ कलाकामिनी॥

ते श्रीशारदा विश्वमोहिनी । नमिली मीयां॥5॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।