सुखकर्ता दुःखहर्ता

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची ।

नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची ।

सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची ।

कंठी झलके माळ मुक्ताफलाची ।।

जय देव जय देव ।

जय देव जय देव जय मंगल मूर्ती, ओ श्री मंगल मूर्ती ।

दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ती | जय देव जय देव ।।

ओ गजानन ओ सर्वत्मन

बाप्पा तेरे नाम दिल मैंने है किया

बाप्पा हर पल में मैंने तुझे है जिया

बाप्पा मेरा साथ जो तूने है दिया

बाप्पा तेरी करुणा में जग जी लिया

रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा ।

चंदनाची उटी कुंकुम केशरा ।

हिरेजड़ित मुकुट शोभतो बरा ।

रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरीया ।।

जय देव जय देव ।

जय देव जय देव जय मंगल मूर्ती, ओ श्री मंगल मूर्ती ।

दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ती | जय देव जय देव ।।

ओ गजानन ओ सर्वत्मन

सारा जग तेरी ही तो माया

सब मेरी ख़ातिर तू ही लाया

इस धरती का तू जो दाता

इसे सवारूँगा है यह वादा

लंबोदर पितांबर फणीवर बंधना ।

सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना ।

दास रामाचा वाट पाहे सदना ।

संकटी पावावे, निर्वाणी रक्षावे, सुरवरवंदना ।।

जय देव जय देव जय मंगल मूर्ती, ओ श्री मंगल मूर्ती ।

दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ती | जय देव जय देव ।।

जय देव जय देव....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।