सुरमा गुरुज्ञान वाला अखियों में ऐसा डाला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सुरमा गुरुज्ञान वाला,

अखियों में ऐसा डाला,

आत्मा की हो गई पहचान,

गुरूजी में तेरे क़ुर्बान,

सूरमा गुरुज्ञान वाला,

अखियों में ऐसा डाला,

आत्मा की हो गई पहचान,

गुरूजी में तेरे क़ुर्बान।

त्रेता में रामजी आये,

द्वापर में श्यामजी आये,

त्रेता में रामजी आए,

द्वापर में श्यामजी आए,

कलयुग में आए गुरुमहाराज,

गुरूजी में तेरे क़ुर्बान,

सूरमा गुरुज्ञान वाला,

अखियों में ऐसा डाला,

आत्मा की हो गई पहचान,

गुरूजी में तेरे क़ुर्बान।

राम ने धनुष तोड़ा,

श्याम ने मटकी तोड़ी

गुरुजी ने तोड़ा अभिमान,

गुरूजी में तेरे क़ुर्बान,

सूरमा गुरुज्ञान वाला,

अखियों में ऐसा डाला,

आत्मा की हो गई पहचान,

गुरूजी में तेरे क़ुर्बान।

राम ने बैर खाए,

श्याम ने चावल खाए,

गुरुजी ने तारा संसार,

गुरूजी में तेरे क़ुर्बान,

सूरमा गुरुज्ञान वाला,

अखियों में ऐसा डाला,

आत्मा की हो गई पहचान,

गुरूजी में तेरे क़ुर्बान।

अयोध्या में रामजी आए,

मथुरा में श्याम जी आए,

आसन पे आए महाराज,

गुरूजी में तेरे क़ुर्बान,

सूरमा गुरुज्ञान वाला,

अखियों में ऐसा डाला,

आत्मा की हो गई पहचान,

गुरूजी में तेरे क़ुर्बान।

सुरमा गुरुज्ञान वाला,

अखियों में ऐसा डाला,

आत्मा की हो गई पहचान,

गुरूजी में तेरे क़ुर्बान,

सूरमा गुरुज्ञान वाला,

अखियों में ऐसा डाला,

आत्मा की हो गई पहचान,

गुरूजी में तेरे क़ुर्बान।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।