तू छेती घर आजा दातिया

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॥ पावन पाठ ॥

हंजू अखियाँ दा बन गए ने गहना,

तैनू होर प्रीतम की कहना,

तू छेती घर आजा दातिया....

रोंदियां ने अखियाँ ते हंजू अवाज़ा मारदे,

तकदेयां रावां दिन लंग गए बहार दे,

मैं ते मरके वी ना तेरा लैणा,

तू छेती घर आजा दातिया....

नैयन दुखियारे मेरे तैनू रहंदे ढोलदे,

दे दर्शन मेरी किस्मत खोलदे,

कदो मुकना विछोड़ा टूटपैना,

तू छेती घर आजा दातिया....

याद तेरी दातिया भुलाया नहिओ भुल्दी,

लब्दी फिरां मैं तैनू गलिया च रुल्दी,

तेरी बन गयी हां तेरी बन रहना,

तू छेती घर आजा दातिया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।