जपो निरंतर भजो निरंतर

पारंपरिक
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जयकारा है जादू मंतर,

कष्ट काट दे सभी भयंकर,

बोले धरती गगन समंदर

जपो निरंतर भजो निरंतर,

जयकारा हारावाले दा, जयकारा हारावाले दा....

सौ लोगों की एक दवाई,

अपने हारावाले माही,

बात नहीं ये सुनी सुनाई,

लाखों भक्तों ने अजमाई,

जयकारा सतगुरु दा प्यारा

कर दे दुखों को छू मंतर

बोले धरती गगन समंदर

जपो निरंतर भजो निरंतर,

जयकारा हारावाले दा, जयकारा हारावाले दा....

जयकारा विश्वास का दर्पण,

रामबाण है ये जयकारा,

जयकारा पारस है भक्तों,

जयकारा अमृत की धारा,

जयकारा आशा की ज्योति,

जगमग कर उठता है अंदर,

बोले धरती गगन समंदर,

जपो निरंतर भजो निरंतर,

जयकारा हारावाले दा, जयकारा हारावाले दा....

जयकारा है जादू मंतर,

कष्ट काट दे सभी भयंकर,

बोले धरती गगन समंदर

जपो निरंतर भजो निरंतर,

जयकारा हारावाले दा, जयकारा हारावाले दा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।