मैनु आनंदपुर जाना है

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॥ पावन पाठ ॥

मैनु आनंदपुर जाना है जरूर मेरे मालका,

तेरा दर्शन पाना है जरुर मेरे मालका॥

दाता दे ख्याला विच डूबा दिन रेन वे,

भूख प्यास मेरा खोया सुख चैन वे,

मैनु ओन दा चड़ेया सरूर मेरे मालका,

मैनु आनंदपुर जाना है जरूर मेरे मालका॥

हारावाला दाता सारे जग दा सहारा ऐ,

कईया भगता नू जाके तारा ऐ,

अज चढ़ेया सरूर तेरे नाम दा मालका,

मैनु आनंदपुर जाना है जरूर मेरे मालका॥

दुनिया वाले मैनु ताने बड़े मार दे,

की रखया है ओ ता कुछ भी ना जानदे,

मैनू चढ़ेया सरूर तेरे दर्शना दा मालका,

मैनु आनंदपुर जाना है जरूर मेरे मालका॥

तेरा मेरा रिश्ता सब तो पुराना ऐ,

दुनिया की जाने दास तेरा दीवान ए,

दास दी वारी हुन ला मेरे मालका,

मैनु आनंदपुर जाना है जरूर मेरे मालका॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।